Multai News : मध्यप्रदेश के मुलताई नगर में बुधवार सुबह एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़े दिव्य अवशेष नगर में लाए गए। सुबह करीब 10 बजे बेंगलुरु से यह पावन धरोहर यहां पहुंची, जिसे गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर के शिष्य शिव तेज अपने साथ लेकर आए।
इन अवशेषों को नगर के जगदीश मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया, जहां दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और सत्संग का आयोजन किया गया, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

सतयुग से जुड़ी है ज्योतिर्लिंग की कथा
आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े शिक्षक शिवा खंडेलवाल ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार यह वही प्रथम ज्योतिर्लिंग है, जिसकी स्थापना सतयुग में चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना से की थी। कहा जाता है कि यह शिवलिंग धरती को स्पर्श किए बिना अपने चुंबकीय प्रभाव से हवा में स्थित रहता था, जो इसे अद्वितीय बनाता है।
गजनवी के आक्रमण के बाद गुप्त रूप से सुरक्षित रहे अवशेष
इतिहास के पन्नों में दर्ज वर्ष 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण के दौरान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग खंडित हो गया था। उस समय एक अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार ने इन अवशेषों को सुरक्षित निकालकर दक्षिण भारत पहुंचाया और पीढ़ियों तक गुप्त रखा।
खंडेलवाल के अनुसार, वर्ष 1924 में कांची कामकोटि पीठ के आठवें शंकराचार्य चंद्रशेखर सरस्वती महाराज ने इन अवशेषों को सौ वर्षों तक सार्वजनिक न करने का निर्देश दिया था। अवधि पूर्ण होने पर शास्त्री परिवार ने यह दिव्य धरोहर गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर को सौंपी।
अब देशभर में हो रही है दिव्य यात्रा
गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर के आशीर्वाद से सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के ये अवशेष अब देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु यात्रा पर हैं। शिव तेज ने कहा कि सामान्यतः भक्त ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए दूर-दूर तक जाते हैं, लेकिन इस बार स्वयं शिवलिंग की पावन विरासत बैतूल जिले तक आई है, जो इसे ऐतिहासिक बनाती है।
वैज्ञानिक जांच में भी साबित हुई विशिष्टता
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक परीक्षणों में भी इन अवशेषों को असाधारण पाया गया है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की रिपोर्ट के अनुसार, शिवलिंग के पत्थरों में 120 से 140 गॉस तक का तीव्र चुंबकीय प्रभाव मौजूद है। जांच में बेरियम, सिलिकॉन, मैग्नीशियम, सल्फर और आयरन जैसे तत्व पाए गए हैं।
मद्रास जेम इंस्टीट्यूट (MGI) ने भी इन चुंबकीय गुणों की पुष्टि की है।
धार्मिक आस्था और आधुनिक विज्ञान—दोनों के संगम का प्रतीक बनी यह दिव्य यात्रा अब आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के सहयोग से मुलताई पहुंच चुकी है, जहां श्रद्धालु इसे ईश्वर की विशेष कृपा मानकर दर्शन का लाभ ले रहे हैं।






