Multai News : मुलताई में चल रहे ताप्ती मेले में झूला संचालकों से कर वसूली को लेकर नगर पालिका और संचालकों के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंगलवार को बकाया राशि की वसूली के लिए नगर पालिका का दल मेले में पहुंचा, लेकिन झूला संचालकों के तीखे विरोध के चलते बिना किसी वसूली के ही लौटना पड़ा।

झूला संचालकों का कहना है कि मेला प्रारंभ होने से पूर्व झूलों की जगह के लिए कराई गई नीलामी पारदर्शी नहीं थी और नियमों की अनदेखी की गई। संचालक विक्की और बिट्टू ने आरोप लगाया कि नीलामी के दौरान उनसे न तो कोई सुरक्षा राशि ली गई और न ही शर्तें लिखित रूप में उपलब्ध कराई गईं, जिससे बाद में विवाद की स्थिति बनी।
संचालकों का यह भी कहना है कि नगर पालिका द्वारा भेजे जा रहे नोटिस में बकाया राशि का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में वे ₹10 प्रति वर्गफीट की दर से ही भुगतान करने पर अड़े हुए हैं और इससे अधिक राशि देना उचित नहीं मानते।
बकाया कर वसूलने नगर पालिका का अमला महेश शर्मा के नेतृत्व में मेले में पहुंचा था, लेकिन संचालकों के विरोध के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। नगर पालिका अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में बकाया जमा नहीं किया गया, तो झूलों को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
झूलों और दुकानों की दरों को लेकर भी असंतोष
इस वर्ष नगर पालिका ने पहली बार झूलों के लिए स्थान की नीलामी प्रक्रिया अपनाई थी। मेले में तीन स्थानों पर झूले लगाने की अनुमति दी गई। जहां सामान्य दुकानदारों को ₹10 प्रति वर्गफीट की दर से जगह आवंटित की गई, वहीं झूला संचालकों के लिए यही दर ₹30 से ₹40 प्रति वर्गफीट निर्धारित की गई, जिसे लेकर शुरुआत से ही असंतोष बना हुआ है।
नीलामी के बाद नगर पालिका ने पिछले वर्षों की तुलना में चार गुना अधिक राजस्व मिलने का दावा किया था, लेकिन मेला समाप्त होने के बाद यह दावा कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। अनुमानित ₹15 लाख की वसूली के मुकाबले अब तक केवल करीब ₹5 लाख ही जमा हो पाए हैं। शेष लगभग ₹10 लाख की वसूली नगर पालिका के लिए चुनौती बनी हुई है।






