MP News : रामजन्म भूमि न्यास के पूर्व अध्यक्ष रामविलास जी वेदांती का स्वर्गवास

On: December 15, 2025 11:18 AM
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बैतूल में 19 से 25 दिसंबर को होने वाली थी उनकी रामकथा

MP News : अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन को मजबूत आधार देने वाले संत और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार को निधन हो गया। उन्होंने मध्य प्रदेश के रीवा में दोपहर 12.20 बजे अंतिम सांस ली। वे 67 वर्ष के थे। रीवा में चल रही रामकथा के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बीते दो दिनों से उनका इलाज रीवा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। सोमवार सुबह हालत गंभीर होने पर उन्हें भोपाल एम्स ले जाने की तैयारी की गई थी। एयर एंबुलेंस मौके पर पहुंच भी गई, लेकिन घने कोहरे के कारण लैंडिंग नहीं हो सकी और इससे पहले ही उनका निधन हो गया।

रीवा में जन्म, अयोध्या बनी कर्मभूमि

डॉ. वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गुढ़वा गांव में हुआ था। महज 12 वर्ष की उम्र में वे अयोध्या आ गए थे और फिर पूरा जीवन रामनगरी से जुड़ा रहा। वे हनुमानगढ़ी के महंत अभिराम दास के शिष्य थे और हिंदू धाम, नया घाट अयोध्या में निवास करते थे। उनका वशिष्ठ भवन आश्रम भी अयोध्या में स्थित है।

वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान माने जाते थे और रामलला व हनुमानगढ़ी के समक्ष कई दशकों तक रामकथा का वाचन किया। वे रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य और बाद में इसके कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे।

राजनीतिक जीवन और राम आंदोलन में भूमिका

डॉ. रामविलास दास वेदांती दो बार लोकसभा पहुंचे। वर्ष 1996 में वे उत्तर प्रदेश की जौनपुर जिले की मछलीशहर सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद 12वीं लोकसभा में प्रतापगढ़ से भाजपा सांसद रहे। राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका के कारण वे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बने।

वे बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आरोपी बनाए गए थे, लेकिन वर्ष 2020 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में किसी साजिश के प्रमाण नहीं मिलने की बात कही थी।

अयोध्या में होगा अंतिम संस्कार

उनके उत्तराधिकारी महंत राघवेश दास वेदांती ने बताया कि डॉ. वेदांती का पार्थिव शरीर अयोध्या लाया जा रहा है। मंगलवार सुबह हिंदू धाम से उनकी अंतिम यात्रा निकलेगी, जो राम मंदिर तक जाएगी। सरयू तट पर सुबह 8 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

डॉ. वेदांती के निधन से संत समाज, रामभक्तों और राजनीतिक जगत में शोक की लहर है।

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