Betul Smachar : मुलताई अधिवक्ता संघ ने 13 दिसंबर को प्रस्तावित लोक अदालत का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। संघ ने बुधवार दोपहर 12 बजे उच्चतम न्यायालय, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों सहित कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर अदालत परिसर की दुर्व्यवस्थाओं और लंबित मांगों को लेकर गहरी असहमति दर्ज कराई।
लंबित प्रस्तावों पर कार्रवाई न होने से नाराजगी
संघ अध्यक्ष सीएस चंदेल सहित अधिवक्ताओं ने बताया कि बोरदेही क्षेत्राधिकार के मामलों की सुनवाई मुलताई में करने, बिजली विवादों की सुनवाई फिर से मुलताई में बहाल करने और विशेष न्यायालय की लिंक कोर्ट महीने में चार दिन मुलताई में लगाने जैसे कई प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं। बार-बार निवेदन के बावजूद अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।
दूसरी मंजिल तक पहुंचने में पक्षकारों को दिक्कत
ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि मुलताई तहसील से आने वाले वृद्ध, दुर्घटना पीड़ित और महिला पक्षकारों को दूसरी मंजिल तक सीढ़ियों से पहुंचना अत्यंत मुश्किल होता है। इस समस्या को देखते हुए ई-कोर्ट भवन के पीछे स्थित खाली भूमि पर लिफ्ट और रैंप निर्माण की अनुमति मांगी गई है।
नए अधिवक्ताओं के लिए बैठने की व्यवस्था बड़ी समस्या
पिछले कुछ महीनों में लगभग 60 नए अधिवक्ता संघ से जुड़े हैं, लेकिन न्यायालय परिसर में पर्याप्त बैठने की सुविधा नहीं होने से उन्हें पेड़ों के नीचे खुले में काम करना पड़ता है। बारिश, ठंड और गर्मी के बीच यह स्थिति और गंभीर हो जाती है। इस कारण अभिलेख कक्ष के पश्चिम में खाली भूमि पर अस्थायी शेड निर्माण का अनुरोध किया गया है।
270 अधिवक्ताओं के लिए मौजूदा भवन बेहद छोटा
संघ ने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध 40×100 वर्गफीट का भवन 270 अधिवक्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा करने में नाकाफी है। इसलिए पक्षकार भवन की पहली मंजिल पर कॉन्फ्रेंस हॉल और लाइब्रेरी निर्माण के लिए तैयार नक्शे को मंजूरी देने का आग्रह किया गया है।
जर्जर भवन को नए उपयोग में लाने का सुझाव
इसके साथ ही न्यायालय के पश्चिम दिशा में स्थित सिंचाई विभाग का पुराना, जर्जर भवन मालखाना, रिकॉर्ड रूम, एडीओपी कार्यालय और वाहन पार्किंग के लिए उपयुक्त बताया गया है। संघ ने इसे न्यायालय उपयोग हेतु उपलब्ध कराने की मांग की है।






