Betul Ki Khabar : बैतूल जिले की शाहपुर तहसील अंतर्गत भयावाड़ी गांव में अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपतियों और उनके परिजनों को कथित रूप से सामाजिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। गांव की जातिगत पंचायतों पर अपमान, सामाजिक दूरी बनाने और आर्थिक दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में मंगलवार को आधा दर्जन से अधिक प्रभावित परिवारों ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी है।
एक पीड़िता ने बताया कि करीब छह साल पहले प्रेम विवाह करने के बाद से उसे और उसके परिवार को लगातार तिरस्कार का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने उसे ‘नीची जाति’ कहकर अपमानित किया और पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। न तो उन्हें किसी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में बुलाया जाता है और न ही रिश्तेदारों को उनके घर आने दिया जाता है।
पीड़िता के अनुसार, बार-बार दलित कहकर अपमानित किए जाने के डर से वह अब गांव छोड़कर बाहर रहने को मजबूर है। उसने कहा कि इस माहौल में सम्मान के साथ जीना मुश्किल हो गया है।
यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। गांव के अन्य अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों के परिजन भी सामने आए हैं। उन्होंने शिकायत में बताया कि जाति पंचायतों द्वारा उन पर आर्थिक दंड लगाया जा रहा है। एक पीड़ित परिजन ने बताया कि बेटे के प्रेम विवाह के बाद पंचायत ने 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे दबाव में आकर चुकाना पड़ा।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ‘जाति मिलाने’ और ‘सामाजिक मर्यादा’ के नाम पर पंचायतें प्रभावित परिवारों से जबरन वसूली कर रही हैं। जो लोग इन फैसलों का विरोध करते हैं, उन्हें गांव की बैठकों और आयोजनों से बाहर कर दिया जाता है।
मामले पर एएसपी कमला जोशी ने बताया कि भयावाड़ी गांव से प्रेम विवाह को लेकर विरोध और सामाजिक बहिष्कार की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 10 लोगों के खिलाफ आवेदन मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।






