Betul News : मुलताई को पवित्र नगरी का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया विभागीय अनदेखी के कारण पूरे एक साल से ठप पड़ी हुई है। नगरपालिका परिषद मुलताई लगातार विभिन्न विभागों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग करती रही, लेकिन न किसी विभाग से जवाब आया और न ही कोई पहल शुरू हुई। इस स्थिति से श्रद्धालुओं और नगरवासियों में गहरा असंतोष है।
नगरपालिका के पत्र, विभागों के पास अनुत्तरित
नगरपालिका ने अनुविभागीय अधिकारी को अपने पत्र क्रमांक न.पा./विधानसभा/2025/956 के माध्यम से स्पष्ट बताया कि विधानसभा में पूछे गए सवालों के बाद भी विभागों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
16 दिसंबर 2024 को तत्कालीन विधायक सुखदेव पांसे के तारांकित प्रश्न क्रमांक 3086 के संदर्भ में सभी विभागों को निर्देश जारी किए गए थे। इन पत्रों की प्रतियां भी संबंधित विभागों को भेजी गई थीं, लेकिन एक साल बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कई विभागों को सौंपे गए थे अहम काम
मुलताई को पवित्र नगरी घोषित करने के लिए अलग-अलग विभागों को विशिष्ट जिम्मेदारियां दी गई थीं—
- संस्कृति विभाग को मंदिरों का सर्वे, मास्टर प्लान, धरोहर संरक्षण और धर्मशालाओं के लिए भूमि का प्रावधान करना था।
- स्कूल शिक्षा विभाग से संगीत और संस्कृति महाविद्यालय की स्थापना अपेक्षित थी।
- पर्यावरण और वन विभाग को हरित क्षेत्र और जैव विविधता के संरक्षण का दायित्व दिया गया था।
- राजस्व विभाग को भूमि अभिलेखों की जांच, जबकि सामान्य प्रशासन विभाग को पुरातत्व महत्व वाले स्थलों के चिह्नांकन और “पवित्र क्षेत्र विकास परिषद” के गठन का काम करना था।
नगरपालिका का कहना है कि हर विभाग को कई बार पत्र भेजे गए, मगर आज तक किसी ने प्रतिक्रिया देने की भी जरूरत नहीं समझी।
धार्मिक और सांस्कृतिक विकास कार्य अटके
विभागों की सुस्ती का सीधा असर शहर के विकास पर पड़ा है।
- प्राचीन मंदिरों का संरक्षण
- ताप्ती उद्गम क्षेत्र का विस्तार
- धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
- सांस्कृतिक संस्थानों की स्थापना
जैसे सभी प्रमुख कार्य फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाए। लोगों का कहना है कि पवित्र नगरी बनने का सपना सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।






