Betul News : ताप्ती नदी पर स्थित चंदोरा डैम एक बार फिर अपनी खस्ताहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। 1982 में विश्व बैंक की सहायता से बने इस बांध का इतिहास पहले ही चिंताजनक रहा है। वर्ष 1992 में यह बांध टूट गया था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद 2007 में दरारें पड़ने पर सौ से अधिक गांवों में अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ा था।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से रखरखाव के अभाव में बांध की मुख्य दीवारों पर बड़े-बड़े बबूल के पेड़ और घनी झाड़ियां उग आई हैं। इंजीनियरों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन पेड़ों की जड़ें दीवार की संरचना को कमजोर बना सकती हैं, जिससे भविष्य में फिर किसी हादसे का खतरा बढ़ता जा रहा है।
सिर्फ दीवारें ही नहीं, बल्कि डैम की नहरें और मुख्य सड़क भी झाड़ियों से भरी पड़ी हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि किसी आकस्मिक हालात में राहत कार्य शुरू करना पड़े, तो इन बाधाओं के कारण समय पर कार्रवाई मुश्किल हो सकती है।
चंदोरा डैम बिरुलबाजार, सांडिया, दोहलन समेत कई गांवों की पेयजल जरूरत पूरी करता है। साथ ही करीब 2800 हेक्टेयर कृषि भूमि इसी डैम पर निर्भर है। ऐसे में डैम की अनदेखी का सीधा असर हजारों लोगों के जीवन और खेती-किसानी पर पड़ रहा है।
जल संसाधन विभाग के एसडीओ एसके मरकाम ने स्वीकार किया कि रखरखाव के लिए विभाग के पास पर्याप्त बजट नहीं है। उन्होंने बताया कि टेल मार्ग की सफाई कराई गई है, लेकिन नहरों और मुख्य दीवार के आसपास का काम अभी अधूरा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समय रहते मरम्मत और सफाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में बड़ा हादसा हो सकता है।






