Betul Samachar : मुलताई न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित लोक अदालत ने न केवल लंबित प्रकरणों के निपटारे का रास्ता खोला, बल्कि बिखरते परिवारों को फिर से जोड़ने का भी काम किया। न्यायालय परिसर और उससे लगे मैदान में आयोजित इस लोक अदालत में सैकड़ों मामलों का आपसी सहमति और सुलह के जरिए समाधान किया गया। लोक अदालत में बिजली चोरी, विभिन्न बैंकों से जुड़े ऋण प्रकरणों के साथ-साथ दीवानी और फौजदारी मामलों पर सुनवाई हुई। वर्षों से अदालतों में अटके मामलों का त्वरित निराकरण होने से पक्षकारों को बड़ी राहत मिली।

इस लोक अदालत की सबसे सराहनीय उपलब्धि पारिवारिक मामलों में देखने को मिली। करीब डेढ़ साल से अलग रह रहे तीन से अधिक दंपति न्यायालय और न्यायाधीशों की पहल के बाद दोबारा साथ रहने को राजी हुए। आपसी मतभेदों और छोटी-छोटी बातों से उपजे विवाद, जो अदालत तक पहुंच गए थे, लोक अदालत के सौहार्दपूर्ण माहौल में सुलझ गए।
एडीपीओ मालिनी देशराज और शुभांगी मंगल ने बताया कि ताईखेड़ा निवासी देवेंद्र और गायत्री एक वर्ष से अलग रह रहे थे। लोक अदालत में दोनों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया और परिसर से एक साथ घर रवाना हुए। इसी तरह डेढ़ साल से अलग रह रही कंचन ने भी अपने पति धर्मराज के साथ पुनः गृहस्थ जीवन शुरू करने का फैसला किया। दीपक सहित अन्य दंपतियों ने भी अपने मतभेद दूर कर साथ रहने का संकल्प लिया।

इन पारिवारिक प्रकरणों में न्यायाधीश संजय पाटिल, श्वेता गौतम, संजय भलावी, अभिजीत वास्कले और सरिता डाबर ने एडीपीओ के साथ मिलकर लगातार समझाइश दी। न्यायालय की इस पहल से पक्षकारों को यह समझ में आया कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय आपसी संवाद और समझौता अधिक बेहतर समाधान है।
समझौते के बाद न्यायालय परिसर में भावुक क्षण भी देखने को मिले, जब कुछ दंपतियों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर साथ निभाने का संकल्प लिया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी प्रेरणादायक रहा।
लोक अदालत के माध्यम से जहां सैकड़ों मामलों का त्वरित समाधान हुआ, वहीं कई टूटते रिश्तों को नया जीवन भी मिला।






