Betul Ki Khabar: मुलताई में बुधवार को किसान संघर्ष समिति ने संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर केंद्र सरकार के बीज विधेयक 2025 और बिजली विधेयक 2025 के मसौदों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम, जिला अध्यक्ष जगदीश दोड़के समेत बड़ी संख्या में किसान नेता इस विरोध में शामिल रहे।
“यह कानून किसान और आम लोगों के खिलाफ”—प्रदर्शनकारियों का आरोप
डॉ. सुनीलम ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 11 नवंबर को जारी किया गया बीज विधेयक किसानों को कमजोर करने वाला है, जिस पर 12 दिसंबर तक आपत्तियाँ मांगी गई हैं। उनका आरोप है कि यह कानून लागू होने पर विदेशी कंपनियां और बड़े कॉर्पोरेट भारतीय बीज बाजार पर पूरी पकड़ बना लेंगे। इससे देश की खाद्य सुरक्षा, बीज संप्रभुता और राज्यों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ेगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रस्तावित कानून कृषि क्षेत्र को कॉर्पोरेट नियंत्रण में धकेल देगा और पारंपरिक किसान आधारित खेती को खत्म कर देगा।
बिजली विधेयक को लेकर भी गंभीर सवाल
बिजली विधेयक 2025 पर बोलते हुए डॉ. सुनीलम ने कहा कि कानून पारित होने के बाद बिजली उत्पादन से लेकर सप्लाई तक की पूरी प्रक्रिया निजी कंपनियों के हाथों में चली जाएगी। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन कंपनियों के मुनाफे की कानूनी गारंटी भी तय होगी।
अभी तक उद्योगों से अधिक दर वसूल कर घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को राहत दी जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था में यह संरचना समाप्त हो जाएगी। नतीजतन, किसानों और आम घरों के लिए बिजली महंगी होना तय माना जा रहा है।
“खेती की लागत बढ़ेगी, आत्महत्याओं में जोखिम”
जिला अध्यक्ष जगदीश दोड़के ने चेतावनी दी कि दोनों विधेयकों के लागू होने से कृषि लागत बढ़ेगी, खेती पर कॉर्पोरेट का दबदबा बढ़ेगा और किसान आत्महत्या जैसी घटनाओं में भी वृद्धि हो सकती है।
किसान नेताओं ने विधेयकों को तुरंत वापस लेने की मांग की।






