Betul Khaber : बैतूल जिले के सारनी अंचल में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। पिछले एक सप्ताह के भीतर भीतर राख बांध, सलैया गांव और पाथाखेड़ा के ड्रिलिंग कैंप के आसपास बाघ की गतिविधि की सूचनाओं से स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। बताया जा रहा है कि यह इस क्षेत्र में बाघ के मूवमेंट की पांचवीं घटना है।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने संबंधित इलाकों में गश्त और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान कई स्थानों पर बाघ के पदचिह्न भी पाए गए हैं। चूरना से लेकर सारनी तक का क्षेत्र पहले से ही बाघों का संभावित भ्रमण क्षेत्र माना जाता है, जहां समय-समय पर उनकी उपस्थिति दर्ज होती रही है।
शिकार की कोई घटना सामने नहीं आई
वन विभाग के अनुसार, पिछले सात दिनों में किसी भी वन्य या पालतू पशु के शिकार की पुष्टि नहीं हुई है। जानकारों का कहना है कि नगरीय क्षेत्र के आसपास बड़ी संख्या में आवारा पशु होने के कारण बाघ को भोजन की कमी नहीं होती, जिससे शिकार की घटनाएं सामने नहीं आतीं। आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में पालतू पशुओं पर हमला होने पर ही मामले सामने आते हैं।
सलैया के जंगल में दिखने का दावा
तीन दिन पहले ग्राम पंचायत सलैया के माता मंदिर के समीप जंगल क्षेत्र में एक खेत मालिक ने रात के समय बाघ देखने की बात कही थी। सूचना पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और क्षेत्र का निरीक्षण किया।
एसडीओ फॉरेस्ट अजय वाहने ने बताया कि यह इलाका सीधे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सीमा से जुड़ा है, इसलिए कभी-कभी बाघ का आना-जाना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि करीब पांच दिन पहले पदचिह्न जरूर मिले थे, लेकिन फिलहाल नए निशान नहीं मिले हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या भी है और कई बार लोग भ्रमवश तेंदुए को बाघ समझ लेते हैं। पिछले सप्ताह बाघ की मौजूदगी की संभावना थी, लेकिन वर्तमान में उसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है, हालांकि अब तक कोई स्पष्ट फोटोग्राफिक साक्ष्य नहीं मिला है।






