Betul News : “हमको पीने के लिए पानी नहीं है, आप 1200–1500 रुपए दे रहे हैं… हमें पैसों से कोई मतलब नहीं, हमें पानी चाहिए।” यह गुहार बैतूल जिले के प्रभातपट्टन विकासखंड के बल्हेगांव की ग्रामीण महिलाओं की है, जो मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं। करीब दो हजार आबादी वाले इस गांव में पेयजल संकट इस कदर गहराया है कि महिलाएं किसानों के खेतों में लगे हैंडपंपों से घंटों लाइन में लगकर मुश्किल से आधा लीटर पानी जुटा पा रही हैं।

ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि गांव के हैंडपंपों से लाल और गंदा पानी निकल रहा है। इसी पानी के इस्तेमाल से गांव में सर्दी-जुकाम, पेट दर्द और अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। महिलाओं का कहना है कि सरकार अगर आर्थिक सहायता दे भी रही है, तो जब पीने का साफ पानी ही नहीं होगा, तो उस पैसे का क्या करेंगे।

तीन साल पहले बिछी पाइपलाइन, नल आज भी सूखे
ग्रामीण कमला बाई ने बताया कि तीन साल पहले जल जीवन मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज तक नल में पानी नहीं आया। सरपंच और सचिव से शिकायत करने पर जवाब मिलता है कि यह उनके बस की बात नहीं। गांव में सिर्फ एक ट्यूबवेल है, जिससे पूरी आबादी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही। हालात यह हैं कि नलचालक का वेतन भी ग्रामीण महिलाएं आपस में 50-50 रुपए इकट्ठा कर देती हैं।

ठेकेदार ने बीच में छोड़ा काम
आसपास के गांव चन्दोरा और निरापुर में पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है, लेकिन बल्हेगांव में करीब एक किलोमीटर तक पाइपलाइन डालने के बाद ठेकेदार ने काम बीच में ही छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि भुगतान न मिलने के कारण ठेकेदार ने काम रोक दिया।
सरपंच बोले— नया बोर चालू करेंगे
सरपंच किशन सोलंकी ने बताया कि जल जीवन मिशन की पाइपलाइन व्यवस्था अस्त-व्यस्त है और गांव के तीनों हिस्सों में पानी नहीं पहुंच पा रहा। “पिछले साल एक नया बोर कराया गया था, उसका तार चोरी हो गया था। रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है, अब बोर को चालू करने की व्यवस्था की जा रही है।”
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द ठोस समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते पेयजल संकट नहीं सुलझाया गया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।






