Betul Crime News : चंदन चोरी मामले में पुलिस जांच पर सवाल, अदालत ने गिरफ्तारी अवैधानिक मानकर आरोपियों को किया रिहा

On: January 1, 2026 7:12 AM
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Betul Crime News : बैतूल जिले के आमला एयरफोर्स स्टेशन से चंदन के पेड़ चोरी के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी को अवैधानिक मानते हुए तीनों आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए हैं। हालांकि, इस मामले में पुलिस और बचाव पक्ष के दावों में विरोधाभास सामने आया है।

यह घटना 16 नवंबर की रात की है, जब आमला एयरफोर्स स्टेशन की बाउंड्री ग्रिल काटकर चार चंदन के पेड़ चोरी कर लिए गए थे। चोरी गए चंदन की कीमत करीब 60 से 70 हजार रुपये आंकी गई थी। थाना आमला पुलिस ने इस मामले में संदीप शेंडे, पिंटू नागले और संजय कवरेती को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया था।

पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में बताया गया कि घटना के बाद गठित टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। इसके बाद ग्राम पावल और वरुड क्षेत्र से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर ग्राम कन्हडगांव के पास से चंदन की लकड़ी के पांच लठ्ठे और कटे हुए टुकड़े बरामद किए गए। यह पूरी कार्रवाई थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर के नेतृत्व में की गई थी।

वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने अदालत के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि पुलिस ने आरोपियों को उनकी भाषा में गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए और न ही लिखित रूप में इसकी सूचना दी गई। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि गिरफ्तारी की सूचना अभियुक्तों को कोर्ट में पेश किए जाने से दो घंटे पूर्व तक भी नहीं दी गई थी। साथ ही, विवेचक गिरफ्तारी के ठोस आधार प्रस्तुत करने में भी असफल रहा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अपराध सात वर्ष से कम सजा की श्रेणी में आता है, इसलिए ज्यूडिशियल रिमांड आवश्यक नहीं है। इसी आधार पर न्यायालय ने गिरफ्तारी को अवैधानिक मानते हुए आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए।

हालांकि, न्यायालय ने यह छूट भी दी है कि यदि पुलिस भविष्य में सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करती है, तो वह आरोपियों को दोबारा गिरफ्तार कर सकती है। बचाव पक्ष का कहना है कि अदालत ने सीधे रिहाई का आदेश दिया है, जबकि पुलिस अब भी यह दावा कर रही है कि आरोपियों को जमानत पर छोड़ा गया है, रिहाई नहीं।

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