Betul News : सारनी के राख बांध क्षेत्र में बढ़ी वन्यजीवों की मौजूदगी, सोलर प्लांट के विरोध में उठी आवाज

On: December 30, 2025 9:45 AM
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Betul News : सारनी के राख बांध क्षेत्र में वन्यजीवों की लगातार बढ़ती मौजूदगी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने इस क्षेत्र की भूमि सोलर प्लांट स्थापना के लिए दिए जाने का विरोध करते हुए इसे संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि राख बांध क्षेत्र अब सुरक्षित वन्यजीव आवास के रूप में विकसित हो चुका है।

सारनी निवासी वाइल्डलाइफ एवं नेचर कंजर्वेशन एक्टिविस्ट आदिल खान ने बताया कि हाल ही में राख बांध क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की गई है। रात्रिचर पक्षियों के सर्वेक्षण के दौरान उन्होंने तेंदुए का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह इलाका सक्रिय वन्यजीव आवास बन चुका है। आदिल के अनुसार, यह क्षेत्र पहले से ही जैव विविधता से समृद्ध था, लेकिन वन विभाग द्वारा किए गए व्यापक वृक्षारोपण के बाद यहां वन्यजीवों की संख्या और गतिविधियां बढ़ी हैं।

सोलर प्लांट से वन्यजीवों पर खतरा
आदिल खान ने कहा कि यदि पहले सोलर प्लांट की अनुमति दे दी जाती, तो न तेंदुए जैसे बड़े वन्यप्राणी यहां टिक पाते और न ही पक्षियों की इतनी विविध प्रजातियां दिखाई देतीं। औद्योगिक गतिविधियों से इस क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

106 हेक्टेयर में 50 हजार पौधों का रोपण
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राख बांध क्षेत्र की 106 हेक्टेयर भूमि पर करीब 50 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इसके चलते इलाका पूरी तरह हराभरा हो गया है और वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।

एसडीओ फॉरेस्ट अजय वाहने ने बताया कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्लांटेशन किया गया है और इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) यहां सोलर प्लांट स्थापित करना चाहती है, लेकिन जहां तेंदुए के पगचिह्न और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी मिली है, वहां यह स्पष्ट है कि वन्यजीवों की आवाजाही बनी हुई है। चूंकि यह क्षेत्र जंगल से सटा हुआ है, इसलिए भूमि उपयोग को लेकर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।

टाइगर कॉरिडोर का अहम बफर ज़ोन
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि राख बांध क्षेत्र केवल सारनी की हरियाली का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सतपुड़ा–मेलघाट टाइगर कॉरिडोर के लिए भी एक महत्वपूर्ण बफर ज़ोन है। यहां औद्योगिक गतिविधियां शुरू होने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने शासन से मांग की है कि राख बांध क्षेत्र की भूमि सोलर प्लांट के लिए न दी जाए और इसे संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर वन्यजीवों व जैव विविधता की स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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