Betul Samachar : प्रभातपट्टन ब्लॉक के ग्राम मासोद विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन से जुड़े गांवों में पिछले एक माह से अघोषित बिजली कटौती का सिलसिला जारी है। बार-बार बिजली बंद होने से जहां ग्रामीण परेशान हैं, वहीं किसान रबी फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। समस्या से नाराज किसानों ने सोमवार को मासोद सब स्टेशन पहुंचकर प्रदर्शन किया और बिजली आपूर्ति सुचारू करने की मांग को लेकर जेई को ज्ञापन सौंपा।
सुबह करीब 11 बजे मासोद, वायगांव, पोहर और साईंखेड़ा खुर्द के किसान बिजली कटौती की समस्या लेकर सब स्टेशन पहुंचे। किसानों ने बताया कि दिन हो या रात, हर दो घंटे में बिजली गुल हो जा रही है। एक बार बिजली बंद होने के बाद दो से ढाई घंटे बाद ही सप्लाई बहाल होती है। इससे खेती के साथ-साथ घरेलू कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे किसानों प्रवीण जायसवाल, गुलाब सिंह ठाकुर, संतोष देशमुख और प्रकाश माकोड़े ने कहा कि लगातार बिजली कटौती के कारण खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है। रबी फसल को इस समय पानी की सबसे अधिक आवश्यकता है, लेकिन बिजली की अनियमित आपूर्ति से फसलें सूखने की कगार पर पहुंच रही हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली गुल रहने से गांवों की पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है। मोटर बंद रहने से पानी की समस्या गहराती जा रही है। वहीं, बार-बार बिजली आने-जाने और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव से विद्युत उपकरण और मोटर पंप खराब हो रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि मासोद सब स्टेशन से जुड़े गांवों में जानबूझकर अधिक कटौती की जा रही है। सिंचाई का समय आते ही बिजली बंद कर दी जाती है। लो वोल्टेज की समस्या के चलते कई बार मोटर पंप चालू ही नहीं हो पाते, जबकि कभी-कभी हाई वोल्टेज से मोटर जल रही हैं। शिकायत करने पर अधिकारियों द्वारा लोड शेडिंग या फॉल्ट का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचा जा रहा है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो सब स्टेशन के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
इस संबंध में मासोद सब स्टेशन के जेई तुलसीराम सलाम ने किसानों को 24 घंटे के भीतर समस्या समाधान का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि लोड शेडिंग के कारण ट्रिपिंग की समस्या आ रही है, जिसे ठीक किया जा रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं और वोल्टेज की समस्या भी जल्द दूर की जाएगी।
वायगांव, मासोद, पोहर और साईंखेड़ा खुर्द के किसानों ने बताया कि कुओं और ट्यूबवेल में अब बहुत कम पानी बचा है। समय पर सिंचाई नहीं हुई तो फसल पीली पड़ जाएगी और उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों किशोर जायसवाल, संजय पालीवाल, पवन ठाकुर और कृष्णा माथनकर ने कहा कि रात में ठंड के बीच खेतों में जाकर बिजली का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन बार-बार कटौती से पूरी रात जागने के बाद भी आधे से एक एकड़ की ही सिंचाई हो पा रही है। किसानों ने मांग की है कि तय शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति की जाए।






