Betul Khaber : बैतूल जिले के बीजादेही थाना क्षेत्र से कर्नाटक गन्ना कटाई के लिए भेजे गए 16 मजदूरों को पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू कर वापस ला लिया है। इन मजदूरों में सात मासूम बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें कम मजदूरी और अमानवीय हालात में जबरन रोके जाने की शिकायत सामने आई थी।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब ग्राम फोफ्लिया निवासी रूपलाल मवासे और दिनेश कासदे ने बीजादेही थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि गांव के 16 लोगों को ठेकेदार राकेश वंशकार (टिमरनी) और शांरग ठेकेदार (धारणी, महाराष्ट्र) के माध्यम से कर्नाटक के बीजापुर जिले में गन्ना कटाई के काम पर भेजा गया था। वहां खेत मालिक कल्याण कुमार के यहां उन्हें काम कराया जा रहा था।
कर्नाटक पहुंचने के बाद मजदूरों को तय मजदूरी से काफी कम भुगतान दिया जा रहा था। जब मजदूरों ने वापस घर लौटने की बात कही, तो उन्हें रोका गया और जाने नहीं दिया गया। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि वहां भोजन और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। फंसे मजदूरों में शिवनारायण मवासे, श्यामवती, जयनारायण मवासे, सरोता बाई, नामनारायण, कमला, अनिल, ज्ञानसिंह, अनिता सहित सात छोटे बच्चे शामिल थे।
अंतरराज्यीय तालमेल से सफल हुआ रेस्क्यू
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बैतूल पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने कर्नाटक के बीजापुर जिले के एसपी से सीधे संपर्क किया। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय के चलते त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी।
एसडीओपी शाहपुर मयंक तिवारी के नेतृत्व में बीजादेही थाने की विशेष टीम को कर्नाटक रवाना किया गया। स्थानीय पुलिस की मदद से टीम सिंदगी तहसील के ग्राम कंकड़मेली पहुंची, जहां मजदूरों को रखा गया था। खेत मालिक से चर्चा के बाद सभी मजदूरों को सिंदगी थाने लाया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।
सुरक्षित सफर के बाद घर पहुंचे मजदूर
रेस्क्यू किए गए 16 मजदूरों (5 पुरुष, 4 महिलाएं और 7 बच्चे) को पहले बस से कलबुरगी रेलवे स्टेशन ले जाया गया, वहां से ट्रेन द्वारा इटारसी और फिर बीजादेही लाया गया। थाना पहुंचने पर सभी मजदूरों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस पूरे अभियान को पुलिस प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता का उदाहरण माना जा रहा है। कार्रवाई में एसपी वीरेंद्र जैन, एसडीओपी मयंक तिवारी, थाना प्रभारी राजकुमार मीना, एसआई जी.पी. बिल्लोरे, प्रधान आरक्षक जगदीश देवड़ा, आरक्षक मिथिलेश उईके और साइबर सेल के आरक्षक बलराम सिंह राजपूत की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही।






