MP Labour Rescue : तमिलनाडु से मुक्त कराए गए भीमपुर के 24 आदिवासी मजदूर बैतूल पहुंचे, बंधुआ मजदूरी से कराया गया रेस्क्यू

On: March 12, 2026 7:35 AM
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MP Labour Rescue : बैतूल। तमिलनाडु के ईरोड जिले में बंधुआ मजदूरी की स्थिति में फंसे भीमपुर ब्लॉक के 24 आदिवासी मजदूरों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग के हस्तक्षेप के बाद मुक्त कराकर मध्यप्रदेश लाया गया। बुधवार को सभी मजदूर बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें रिसीव किया गया और देर रात बस से उनके गांव भेज दिया गया।

जानकारी के अनुसार भीमपुर क्षेत्र के ये मजदूर पिछले चार-पांच महीनों से तमिलनाडु के मोडाकुरिची क्षेत्र के ओलापालयम गांव में बंधुआ मजदूरी की स्थिति में काम कर रहे थे। मामले की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग तक पहुंची, जिसके बाद आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया।

आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर आयोग के सलाहकार और पूर्व जिला न्यायाधीश प्रकाश उइके ने तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव और बैतूल पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कराई। इसके बाद तमिलनाडु पुलिस सक्रिय हुई और ईरोड जिले में कार्रवाई करते हुए सभी 24 मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

रेस्क्यू के बाद मजदूरों को दो दिन तक मोडाकुरिची के कम्युनिटी हॉल में रखा गया, जहां श्रम विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। इसके बाद 10 मार्च 2026 को शाम 5:15 बजे उन्हें राप्तीसागर एक्सप्रेस से मध्यप्रदेश के लिए रवाना किया गया। यात्रा के दौरान पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे।

बुधवार को मजदूर बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी, एसपी वीरेंद्र जैन, एएसपी कमला जोशी, एसडीएम अभिजीत सिंह और श्रम अधिकारी धम्मदीप भगत सहित अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत कर उनसे बातचीत की और उनकी स्थिति की जानकारी ली।

मुक्त कराए गए मजदूरों में 4 महिलाएं, 5 नाबालिग लड़कियां, 1 बच्चा और 14 पुरुष शामिल हैं। इनमें से चार मजदूर हरदा जिले के भी बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने सभी के भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कराते हुए देर रात बस के माध्यम से उन्हें उनके गांवों के लिए रवाना कर दिया।

मजदूर संगीता ने बताया कि उनसे सुबह 7 बजे से रात 12 बजे तक गन्ना कटवाया जाता था। करीब 16 घंटे तक काम कराया जाता था, जबकि खाने में केवल चावल दिया जाता था। उन्होंने बताया कि वहां किसी से बात करने, फोन पर संपर्क करने या बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और ठेकेदार के लोग लगातार निगरानी करते रहते थे।

एक अन्य मजदूर अल्लू ने बताया कि उन्हें पहले महाराष्ट्र के सोलापुर ले जाया गया और वहां से तमिलनाडु भेज दिया गया। उन्हें पहले दिवाली और फिर होली पर घर भेजने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें वापस आने नहीं दिया जा रहा था।

इस पूरे रेस्क्यू अभियान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े कार्यकर्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी पहल से ही मामला संबंधित अधिकारियों और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग तक पहुंच सका, जिसके बाद मजदूरों की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी।

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