Betul News: बैतूल/भैंसदेही। भैंसदेही ब्लॉक के छोटे से गांव रामघाटी के दो युवा— युवराज जगन आहके और दयाराम रमन चिचाम— भारतीय सेना की अग्निवीर योजना में चयनित होकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। गुरुवार को दोनों युवा अपनी प्रारंभिक सैन्य ट्रेनिंग के लिए बिहार के दानापुर रवाना हुए, जहां उनके सम्मान में पूरे गांव ने ऐसा उत्साह दिखाया मानो कोई बड़ा पर्व मनाया जा रहा हो। तिरंगे की छांव, ढोल-नगाड़ों और उत्साहभरे नारों के बीच ग्रामीणों ने दोनों नवअग्निवीरों का गर्मजोशी से सम्मान किया।

गांव से पहली बार सेना में चयन, ग्रामीणों में खुशी की लहर
करीब एक हजार मतदाताओं वाले रामघाटी से पहली बार किसी युवा ने सेना में कदम रखा है। इस उपलब्धि ने न केवल गांव बल्कि पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। विदाई समारोह में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
युवराज की प्रेरक यात्रा— मां की मेहनत और खुद का संकल्प
युवराज आहके के पिता का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था। उनकी मां सिलाई कर परिवार का खर्च चलाती हैं। 12वीं के बाद उन्होंने बीए द्वितीय वर्ष तक पढ़ाई की और तैयारी के लिए बैतूल की एक लाइब्रेरी व प्राइवेट ट्रेनिंग एकेडमी का सहारा लिया। युवराज ने कहा, “मैं सेना में जाकर मां का सपना पूरा करूंगा और देश सेवा में पूरी निष्ठा से जुटूंगा।”
दयाराम की कहानी— किसान परिवार से उठकर सेना तक
दयाराम चिचाम किसान परिवार से आते हैं। तीन भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे दयाराम ने खेती में हाथ बंटाने के साथ अपनी पढ़ाई और भर्ती की तैयारी जारी रखी। उनके बड़े भाई भी बीएसएफ में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। दयाराम का कहना है, “अग्निवीर योजना युवाओं को देशसेवा का अनमोल अवसर देती है। मैं इसे पूरी जिम्मेदारी से निभाऊंगा।”
दानापुर में छह महीने की ट्रेनिंग
दोनों युवाओं का चयन बिहार रेजिमेंट सेंटर, दानापुर में हुआ है, जहां वे छह महीने का प्रारंभिक सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इसके बाद उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में नियुक्त किया जाएगा। गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि इन दोनों की सफलता से अब गांव के अन्य युवा भी प्रेरित होंगे।
अंत में, पूरे गांव ने दोनों अग्निवीरों को तिरंगे की छांव में शुभकामनाएं देकर भावनात्मक विदाई दी।






