Betul News : बैतूल/आमला। जिले के आमला ब्लॉक अंतर्गत बिसखान पंचायत के खारी गांव में प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप कर एक बाल विवाह रुकवा दिया। गुरुवार को बारात आने से ठीक पहले प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और जांच के बाद शादी को रोक दिया गया।
जानकारी के अनुसार, खारी निवासी परिवार अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में जुटा था। बारात छिंदवाड़ा जिले के एक गांव से आने वाली थी। घर में सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और मेहमानों के लिए भोजन भी बन चुका था।
दस्तावेजों में उम्र को लेकर विरोधाभास
सूचना मिलने पर एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया के मार्गदर्शन में टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान लड़की के जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड में उसकी उम्र बालिग दर्शाई गई, जबकि आंगनवाड़ी रिकॉर्ड और सर्वे पंजी में उसे नाबालिग पाया गया। दस्तावेजों में 11 अप्रैल 2008 और 11 अप्रैल 2011 की अलग-अलग जन्म तिथियां दर्ज मिलीं।
समझाइश के बाद परिजन माने
जांच के आधार पर प्रशासन ने विवाह रुकवा दिया। अधिकारियों द्वारा समझाइश देने पर परिजन भी सहमत हो गए और उन्होंने लड़की की 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ही विवाह करने की बात मानी।
परिवार ने जताई नाराजगी
कार्रवाई के बाद लड़की के पिता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि उन्हें पहले जानकारी दी जाती तो वे इतनी तैयारी और खर्च नहीं करते। उनका कहना था कि अंतिम समय में कार्रवाई से सामाजिक असहजता और आर्थिक नुकसान हुआ है।
स्थानीय अमले की भूमिका पर सवाल
घटना के बाद गांव में यह सवाल उठ रहे हैं कि शादी की तैयारियां पहले से चल रही थीं, ऐसे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा, कोटवार, पटवारी, सरपंच और सचिव को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई या समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
आमला के सीडीपीओ निर्मल सिंह ठाकुर ने बताया कि स्थानीय कार्यकर्ता ने करीब 15 दिन पहले परिवार को समझाइश दी थी, लेकिन परिवार नहीं माना। उन्होंने कहा कि यदि सूचना समय पर उच्चाधिकारियों तक पहुंचती, तो विवाह पहले ही रोका जा सकता था।
कार्रवाई में कई अधिकारी रहे मौजूद
इस कार्रवाई के दौरान परियोजना अधिकारी निर्मल सिंह ठाकुर, तहसीलदार ऋचा कौरव, पर्यवेक्षक देवा बेले सहित राजस्व और महिला बाल विकास विभाग की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने बताया कि सूचना में देरी को लेकर स्थानीय अमले के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की जा रही है।






