Betul Khabar : पाथाखेड़ा के ठेका मजदूरों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, 3–4 माह से वेतन न मिलने का आरोप

On: March 10, 2026 10:51 AM
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Betul Khabar : बैतूल। जिले के पाथाखेड़ा कोयला क्षेत्र की भूमिगत खदानों में कार्यरत ठेका मजदूरों ने मंगलवार को वेतन भुगतान में देरी और शोषण का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया। पिछले 10 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। कलेक्टर ने श्रम अधिकारी को सात दिनों के भीतर जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जान जोखिम में डालकर करते हैं काम

मजदूरों का कहना है कि वे Western Coalfields Limited (डब्ल्यूसीएल) की भूमिगत कोयला खदानों में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर पूरी मजदूरी नहीं मिल रही है। कई मजदूरों को पिछले 3 से 4 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जबकि कुछ को आधा भुगतान ही किया गया है।

1365 रुपए तय मजदूरी, ठेकेदार वापस ले लेते हैं पैसा

मजदूरों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन के अनुसार मजदूरी करीब 1365 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मिलनी चाहिए, लेकिन कई बार भुगतान ही नहीं होता। यदि मजदूरी खाते में डाल भी दी जाती है, तो ठेकेदार दबाव बनाकर मजदूरों के पास सिर्फ 400 से 500 रुपए छोड़ते हैं और बाकी रकम वापस ले लेते हैं।
मजदूरों का कहना है कि पूरी मजदूरी मांगने पर उन्हें काम से निकालने की धमकी दी जाती है और गनमैन लाकर डराने का प्रयास भी किया जाता है।

PF खाते में भी अनियमितता का आरोप

मजदूरों ने बताया कि पाथाखेड़ा क्षेत्र की खदानों में करीब 18 ठेकेदार काम कर रहे हैं, जिनके अधीन 450 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। उनका आरोप है कि Coal Mines Provident Fund Organisation (सीएमपीएफ) खाते में भी अनियमितताएं हैं और उन्हें यह तक जानकारी नहीं दी जाती कि उनके खाते में कितनी राशि जमा हो रही है।

10 दिन से भूख हड़ताल, 7 दिन में जांच के निर्देश

ठेका मजदूर पिछले 10 दिनों से पाथाखेड़ा में डब्ल्यूसीएल कार्यालय के पास अपनी मांगों को लेकर क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मंगलवार को मजदूर नेता प्रदीप नागले और मनोज पवार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मजदूर बैतूल पहुंचे और कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर बकाया वेतन भुगतान और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
कलेक्टर ने मजदूरों की समस्याएं सुनने के बाद श्रम अधिकारी को सात दिनों के भीतर पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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