Betul Child Abandonment Case : बैतूल। कोतवाली में शनिवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पुलिस, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को भी हैरानी में डाल दिया। एक 26 वर्षीय महिला अपनी गोद में डेढ़ माह की बच्ची को लेकर थाने पहुंची और पुलिस को बताया कि बस स्टैंड पर एक अज्ञात महिला उसकी गोद में बच्ची देकर यह कहकर चली गई थी कि वह कुछ देर में लौट आएगी, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी वापस नहीं आई। महिला ने बच्ची को लावारिस बताते हुए उसे पुलिस के सुपुर्द करने की बात कही।
पहली नजर में मामला किसी लावारिस बच्ची के मिलने का लगा, लेकिन महिला के बयान और उसके व्यवहार में कई विरोधाभास नजर आने पर पुलिस को संदेह हुआ। थाना प्रभारी देवकरण डहरिया ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला से विस्तृत पूछताछ शुरू कराई। महिला की बातों में बार-बार बदलाव होने और उसके असहज व्यवहार ने पुलिस का शक और गहरा कर दिया।
पुलिस ने नियमानुसार बच्ची को बाल कल्याण समिति के माध्यम से शिशु गृह मात्रछाया भेज दिया। मामले की जानकारी मिलने पर सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष अभिषेक जैन भी सक्रिय हुए। उन्होंने महिला की कहानी पर संदेह जताते हुए उसे बैतूल में ही रोककर रखने के निर्देश दिए, ताकि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
जांच के दौरान पुलिस महिला को बस स्टैंड लेकर पहुंची और घटनास्थल के बारे में जानकारी जुटाने लगी। जब महिला को बताया गया कि बस स्टैंड क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाएगी, तो वह घबराई हुई दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने महिला के मोबाइल फोन की जांच की और उसके पति तथा अन्य परिजनों से संपर्क कर उन्हें थाने बुलाया।
इसी दौरान महिला को आगे की प्रक्रिया के लिए वन स्टॉप सेंटर भेजा गया, जहां उसकी अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। बाद में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
कुछ समय बाद महिला का पति और भाई थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस को बताया कि महिला अर्जुन नगर में अपने पति के साथ रहती है और शनिवार सुबह गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने की बात कहकर घर से निकली थी। परिजनों ने यह भी बताया कि महिला की गोद में मौजूद डेढ़ माह की बच्ची उसकी अपनी बेटी है।
परिजनों के बयान सामने आने के बाद पूरा मामला पलट गया। जांच में स्पष्ट हो गया कि किसी अज्ञात महिला द्वारा बच्ची को सौंपकर चले जाने की कहानी पूरी तरह मनगढ़ंत थी। महिला ने खुद अपनी बच्ची को लावारिस बताकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया था।
महिला के पति ने पुलिस को बताया कि दोनों ने करीब चार वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। उनकी एक चार वर्षीय बेटी और दूसरी डेढ़ माह की नवजात बच्ची है। पत्नी ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसकी जानकारी उसे भी नहीं है। पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने पर महिला भी कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सकी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार महिला मूल रूप से दामजीपुरा क्षेत्र की रहने वाली है। प्रारंभिक जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि उसके मोबाइल फोन पर लगातार एक पुरुष के कॉल आ रहे थे। इसी आधार पर पुलिस प्रेम संबंध और संभावित लव ट्रायंगल के एंगल से भी मामले की जांच कर रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
सूत्रों का मानना है कि महिला संभवतः बच्ची को छोड़कर कहीं और जाने की योजना बना रही थी, लेकिन उसकी योजना सफल नहीं हो सकी। फिलहाल महिला जिला अस्पताल में भर्ती है। रविवार को महिला और बच्ची को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। समिति और पुलिस महिला की मानसिक स्थिति, बच्ची की सुरक्षा और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को देखते हुए आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक मां ने अपनी ही डेढ़ माह की बच्ची को लावारिस बताने की कहानी क्यों गढ़ी। इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए पुलिस और बाल कल्याण समिति की जांच जारी है।
