भोपाल/बैतूल। पंचायतों में महिलाओं को 50% से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने के बावजूद जमीनी हकीकत अलग तस्वीर पेश कर रही है। मध्यप्रदेश में बीते 11 साल (1 जनवरी 2015 से 31 मार्च 2026) के दौरान 5 हजार सरपंचों पर भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए, जिनमें 15% यानी 753 महिला सरपंच शामिल हैं।
प्रदेश में कुल 23,011 सरपंचों में 11,683 महिलाएं हैं, लेकिन जांच में सामने आया कि कई जगह वे सिर्फ नाम की सरपंच रहीं। असली निर्णय उनके पति, रिश्तेदार या स्थानीय प्रभावशाली लोग लेते रहे।
जांच में खुलासा: महिलाओं के नाम पर चला खेल
पड़ताल में सामने आया कि कई महिला सरपंचों से केवल दस्तावेजों पर अंगूठा या हस्ताक्षर कराए जाते थे। बाद में उन्हीं कागजों के आधार पर भुगतान और विकास कार्य दिखाए गए। गड़बड़ी सामने आने पर कार्रवाई उन्हीं महिलाओं के खिलाफ हुई, जिन्हें कई मामलों की जानकारी तक नहीं थी।
सबसे ज्यादा प्रभावित पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वे महिलाएं रहीं, जो न शिक्षित थीं और न ही प्रशासनिक प्रक्रिया समझती थीं। कई पूर्व सरपंच आज भी यह नहीं जानतीं कि उन पर आरोप क्या हैं। उनका कहना है— “हम तो बस नाम के सरपंच थे, पंचायत कोई और चलाता था।”
जमीनी उदाहरणों ने खोली पोल
- भैंसदही की धाबा पंचायत की पूर्व सरपंच साहो परते पर 1.88 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च का आरोप है, जबकि उनका दावा है कि निर्माण कार्य उनके कार्यकाल से पहले का है।
- इटारसी की घाटली पंचायत की मीना इवने मजदूरी करती थीं। ग्रामीणों के मुताबिक उनकी आड़ में पंचायत चलाई गई। अब वे गांव छोड़ चुकी हैं।
- गुना की रिजौदा-इमलिया पंचायतों में सरपंच महिलाएं हैं, लेकिन पोर्टल पर पतियों के नाम दर्ज मिले। एक ही पैटर्न पर भुगतान और मस्टर रोल में गड़बड़ी भी सामने आई।
कानून सख्त, लेकिन महिलाएं फंस रहीं
मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 92 के तहत गबन साबित होने पर सरपंच से राशि वसूली जाती है। पैसा जमा न करने पर सिविल जेल का भी प्रावधान है। ऐसे में कई महिलाएं, जिन्हें गड़बड़ी की जानकारी तक नहीं थी, अब कानूनी कार्रवाई और रिकवरी का सामना कर रही हैं।
केस-1: लाखों की वसूली का बोझ
शिवपुरी की रन्नौद पंचायत की पूर्व सरपंच धनियाबाई पर 8.48 लाख (सर्व शिक्षा अभियान) और 1.50 लाख (सामुदायिक भवन) में अनियमितता के आरोप हैं। वे आज भी मजदूरी कर जीवन यापन कर रही हैं। मामला 2017 से लंबित है।
केस-2: 75 साल की महिला पर रिकवरी
बैतूल की राक्सी पंचायत की पूर्व सरपंच गांग्याबाई पर 39 हजार रुपए की रिकवरी है। आरोप आंगनबाड़ी निर्माण में अतिरिक्त खर्च का है। 75 वर्षीय गांग्याबाई को मामले की पूरी जानकारी तक नहीं है, फिर भी केस दर्ज है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
यह स्थिति पंचायतों में महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिला, वहीं कई जगह उनकी आड़ में सत्ता का संचालन दूसरों ने किया और कार्रवाई का सामना उन्हें करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को अधिकारों की जानकारी, प्रशासनिक प्रशिक्षण और निगरानी तंत्र मजबूत किए बिना वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं है।






