महंगी सफाई के बाद भी समस्या बरकरार, वैज्ञानिक और स्थायी समाधान के निर्देश
Betul News : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने माचना नदी में बढ़ती जलकुंभी की समस्या पर कड़ा रुख अपनाया है। भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्र पीठ ने 12 मार्च 2026 को प्रकाशित एक खबर का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को नदी के पुनरुद्धार के लिए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्ट में सामने आया था कि बैतूल शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली माचना नदी जलकुंभी और अन्य जलीय खरपतवारों से पूरी तरह ढंक चुकी है। कई स्थानों पर पानी तक दिखाई नहीं दे रहा, जिससे जल में ऑक्सीजन की कमी हो रही है और जलीय जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।
इस स्थिति के चलते मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। पूर्व में मशीनों के जरिए सफाई पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन कुछ ही समय में समस्या दोबारा खड़ी हो गई, जिससे अस्थायी उपायों की सीमाएं उजागर हो गई हैं।
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल एकमुश्त सफाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। अधिकरण ने जल संसाधन विभाग, कलेक्टर बैतूल और नगरपालिका को आपसी समन्वय से काम करते हुए नियमित रखरखाव और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, छह माह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इस संबंध में कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवाने ने बताया कि गर्मियों में जलकुंभी की समस्या अधिक बढ़ जाती है। इसे मैन्युअल तरीके से हटाने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही इसके स्रोतों की पहचान कर उन्हें रोकने और जैविक पद्धतियों के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है।
हालांकि, सिंचाई विभाग के एसडीओ भूपेंद्र सिंह, नगरपालिका के एई नीरज धुर्वे और स्वयं कलेक्टर ने एनजीटी के ताजा आदेश की औपचारिक जानकारी नहीं होने की बात कही है। इसके बावजूद प्रशासन ने जल्द सफाई अभियान शुरू कर माचना नदी के पुनर्जीवन का भरोसा दिलाया है।






