Betul Accident Prone Road : बरेठा घाट सड़क निर्माण का रास्ता साफ, स्टे हटते ही शुरू होगा काम; हादसों पर लगेगा ब्रेक

On: March 20, 2026 11:45 AM
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Betul Accident Prone Road : बैतूल जिले के बहुप्रतीक्षित बरेठा घाट सेक्शन में सड़क निर्माण को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से टाइगर कॉरिडोर और कानूनी अड़चनों के कारण रुका यह प्रोजेक्ट अब जल्द शुरू होता नजर आ रहा है।

जानकारी के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ी जरूरी केंद्रीय और वन्यजीव संरक्षण संबंधी सभी मंजूरियां हासिल कर ली हैं। अब इन अनुमतियों को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष पेश कर स्टे हटाने की प्रक्रिया की जाएगी। जैसे ही कोर्ट से आदेश मिलेगा, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

टाइगर कॉरिडोर में फंसा था काम
राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के अंतर्गत इटारसी से बैतूल के बीच करीब 20.91 किलोमीटर का बरेठा घाट केसला और भौंरा रेंज के टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर में आता है। वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए 1 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने यहां निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी।

खतरनाक घाट, बढ़ते हादसे
बरेठा घाट को सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। संकरी, घुमावदार सड़क, तेज ढलान और सीमित दृश्यता के कारण यहां दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। पिछले तीन वर्षों में इस घाट पर 50 से अधिक हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान गई और कई घायल हुए। ऐसे में इस सड़क का उन्नयन लंबे समय से जरूरी माना जा रहा है।

4 लेन सड़क, आधुनिक सुविधाएं
NHAI के नए प्लान के तहत इस सड़क को 2 लेन से 4 लेन में बदला जाएगा। घुमावदार रास्तों को सुधारा जाएगा और ब्लैक स्पॉट्स को खत्म किया जाएगा। प्रोजेक्ट में 3 माइनर ब्रिज, 38 बॉक्स कलवर्ट, 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास का निर्माण किया जाएगा।

वन्यजीव संरक्षण पर खास फोकस
इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। टाइगर समेत अन्य जानवरों की आवाजाही बनाए रखने के लिए 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास बनाए जाएंगे। साथ ही सड़क किनारे फेंसिंग, क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप और साइन बोर्ड जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।

कुल मिलाकर, स्टे हटने के बाद बरेठा घाट का यह प्रोजेक्ट न सिर्फ यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाएगा, बल्कि विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का भी उदाहरण बनेगा।

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