Betul Samachar : बैतूल। जिले के ग्राम कोसमी में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए की जा रही भूमि आवंटन प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि जिस भूमि पर कॉलेज निर्माण प्रस्तावित है, उस पर वे कई दशकों से रह रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, खसरा नंबर 48/1, 48/2 और 51/3/1 की शासकीय भूमि को मेडिकल कॉलेज के लिए चिह्नित किया गया है। लेकिन इन जगहों पर लगभग 70 परिवार वर्ष 1980 से अपने पक्के घर बनाकर रह रहे हैं। वर्ष 1998 में इन्हें राजीव गांधी आश्रय योजना और ग्राम पंचायत के माध्यम से पट्टे भी प्रदान किए गए थे।
“सीमांकन में आए हमारे घर” – ग्रामीण
जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे ने बताया कि जब कॉलेज की जमीन का सीमांकन किया गया, तब यह सामने आया कि कई ग्रामीणों के मकान भी उस क्षेत्र में शामिल कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि चार दशक से अधिक समय से यहां रह रहे लोगों को हटाना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत।
आवासीय क्षेत्र घोषित करने की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उक्त भूमि को आवासीय क्षेत्र घोषित कर सभी परिवारों को स्थायी स्वामित्व अधिकार दिए जाएं। उनका कहना है कि यदि यह जमीन कॉलेज को दी गई तो दर्जनों परिवार बेघर हो जाएंगे।
ज्ञापन सौंपने वालों में नारायण कापसे, अंशु उइके, गणपति हैडो, यमुना बाई, संतोष उइके, कीर्ति कुबड़े, विमला, रेखा, बस्तीराम जावसकर, सुदिया धुर्वे और जगनू गजाम समेत कई ग्रामीण शामिल थे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन शुरू करेंगे।






