Betul News: बैतूल ज़िले के जिला अस्पताल में एक आदिवासी महिला की मौत के बाद शनिवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया। मृतका के परिजनों और आदिवासी संगठनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इलाज में लापरवाही बरतने वाली डॉक्टर के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रसव के कुछ दिन बाद बिगड़ी तबीयत
चौपना क्षेत्र के ईमलीखेड़ा गांव की 25 वर्षीय समोती पति अमन मोचम ने 7 नवंबर को जिला अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया था। सामान्य प्रसव के बाद 12 नवंबर को उन्हें घर भेज दिया गया था। परिजनों के अनुसार, शुक्रवार सुबह समोती की हालत अचानक खराब हो गई। शाम होते-होते स्थिति गंभीर होने पर उन्हें निजी वाहन से जिला अस्पताल लाया गया। उपचार के दौरान रात में उनकी मौत हो गई।
समय पर इलाज न मिलने का आरोप
मृतका के परिजनों का कहना है कि समोती की गंभीर हालत को देखते हुए भी जरूरी उपचार समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया। परिवार ने ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर पर लापरवाही और गलत दस्तावेजों पर अंगूठा लगवाने का आरोप भी लगाया है। साथ ही, मौत के बाद कुछ साक्ष्य छिपाने की कोशिश किए जाने की बात भी उठाई गई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पोस्टमार्टम के बाद भी परिजनों का शव लेने से इनकार
शनिवार सुबह पोस्टमार्टम होने के बावजूद परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया। शव मर्चुरी में ही रखा हुआ है। बढ़ते विवाद को देखते हुए सिविल सर्जन ने चार सदस्यीय मेडिकल टीम बनाकर मामले की जांच का आदेश दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने भी कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है।
ग्रामीणों ने उठाए अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हाल ही में जिला अस्पताल में कई संदिग्ध मौतें हुई हैं, जिससे अस्पताल की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय करने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की है।






