Multai Politics : मुलताई की राजनीति में बढ़ी तल्खी, पार्षद वंदना साहू ने नपा अध्यक्ष नीतू परमार पर लगाए गंभीर आरोप

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मुलताई। नगर पालिका की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। महावीर वार्ड की पार्षद वंदना साहू ने नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हाल ही में महावीर वार्ड में आयोजित एक भूमिपूजन कार्यक्रम में कथित तौर पर उनकी अनदेखी किए जाने के बाद यह विवाद खुलकर सामने आया है।

पार्षद वंदना साहू ने दावा किया कि नगर पालिका अध्यक्ष पद तक पहुंचने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने पहली बार अपना नाम वापस नहीं लिया होता तो नीतू परमार अध्यक्ष नहीं बन पातीं। उन्होंने यह भी कहा कि अध्यक्ष पद को लेकर चले कानूनी विवाद के दौरान उनके नाम से दायर याचिका के आधार पर ही नीतू परमार को स्थगन आदेश प्राप्त हुआ था। बाद में याचिका वापस लेने के बाद ही उनका अध्यक्ष पद सुरक्षित रह सका।

वंदना साहू ने अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में वे अपने वार्ड की नालियों की नियमित सफाई तक नहीं करा सकीं। पार्षद ने कहा कि नगर पालिका की बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाने और विभिन्न मुद्दों को समझने के लिए अध्यक्ष को कई बार उनके सहयोग की आवश्यकता पड़ती थी, लेकिन अब वही उनके वार्ड में आकर राजनीति कर रही हैं।

उन्होंने नगर की राजनीति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि निजी स्वार्थ के कारण नगर की दोनों प्रमुख राजनीतिक धाराओं को कमजोर किया गया है। पार्षद ने अध्यक्ष की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा कि विकास कार्यों की अपेक्षा राजनीतिक गतिविधियों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

पार्षद वंदना साहू ने क्षेत्रीय विधायक को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को केवल छोटे-छोटे भूमिपूजन कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नगर के विकास से जुड़े बड़े और स्थायी कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को दीर्घकालिक विकास योजनाओं की आवश्यकता है, जिससे नगर का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

वंदना साहू के इन बयानों के बाद मुलताई की राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। नगर पालिका की राजनीति में इस बयानबाजी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि, इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार और संबंधित विधायक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस विवाद को लेकर नगर की राजनीति और गर्मा सकती है। फिलहाल सभी की नजरें अध्यक्ष और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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