Forest Officer House Theft : रेंजर के सरकारी बंगले में 10 लाख की चोरी, सीमा विवाद में उलझी रही पुलिस

On: May 12, 2026 10:52 AM
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Forest Officer House Theft : सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के तवा बफर रेंज में रेंजर के सरकारी आवास पर बड़ी चोरी की वारदात सामने आई है। अज्ञात चोर घर से करीब 10 लाख रुपए कीमत के सोने के जेवर, नकदी और अन्य सामान चोरी कर ले गए। घटना का खुलासा सोमवार दोपहर उस समय हुआ, जब रेंजर अमित सिंह चौहान छुट्टी से लौटकर अपने बंगले पहुंचे।

जानकारी के अनुसार, भोपाल-बैतूल नेशनल हाईवे-46 स्थित रेंज ऑफिस परिसर में रेंजर अमित सिंह चौहान का सरकारी आवास है। वे 9 और 10 मई को पारिवारिक कार्य से अवकाश पर थे। इस दौरान आवास में ताला लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि 10 मई की रात अज्ञात बदमाशों ने मकान का ताला तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया।

सोमवार दोपहर करीब 2 बजे जब रेंजर चौहान वापस लौटे तो कमरे का सामान बिखरा पड़ा मिला। जांच करने पर अलमारी से 68 ग्राम का सोने का नेकलेस, 22 ग्राम की सोने की चेन, 75 हजार रुपए नकद, एक चांदी का गिलास और मोबाइल फोन गायब मिले। चोरी गए सामान की कुल कीमत करीब 10 लाख रुपए बताई जा रही है।

सीमा विवाद में उलझी रही पुलिस

घटना के बाद चोरी से ज्यादा चर्चा पुलिस के रवैये की रही। मामला नर्मदापुरम और बैतूल जिले की सीमा से जुड़ा होने के कारण दोनों जिलों की पुलिस देर रात तक क्षेत्राधिकार तय करने में उलझी रही।

रेंजर चौहान ने सबसे पहले शाहपुर की भौंरा चौकी को सूचना दी, लेकिन पुलिस ने घटनास्थल को केसला थाना क्षेत्र का बताते हुए मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद केसला थाना प्रभारी मदनलाल पवार मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। हालांकि बाद में उन्होंने भी इसे शाहपुर थाना क्षेत्र का मामला बताते हुए भौंरा चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही।

2022 में भी हो चुकी है चोरी

केसला थाना प्रभारी मदनलाल पवार ने बताया कि इसी सरकारी आवास में वर्ष 2022 में भी चोरी की घटना हुई थी। उस समय तत्कालीन रेंजर निशांत डोसी ने शाहपुर थाने में मामला दर्ज कराया था। इसी आधार पर वर्तमान मामला भी शाहपुर थाना क्षेत्र में दर्ज होना चाहिए।

वहीं भौंरा चौकी प्रभारी नीरज खरे का कहना है कि फोरलेन के एक हिस्से और नदी के छोर के आधार पर कुछ क्षेत्र केसला थाना सीमा में आते हैं। दोनों थानों के अलग-अलग दावों के चलते देर रात तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी और रेंजर को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भटकना पड़ा।

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