PM Awas Yojana Controversy : बैतूल जिले की आमला तहसील के ग्राम हरन्या में 17 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास और निजी मकान तोड़ने के नोटिस जारी होने से हड़कंप मच गया है। प्रभावित परिवारों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई पर रोक लगाने और राहत देने की मांग की है।
रहवासियों का आरोप है कि आमला तहसीलदार द्वारा उनके मकानों को सरकारी भूमि पर निर्मित बताते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए गए हैं, जबकि वे वर्षों से उक्त भूमि पर निवास कर रहे हैं। कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से कुछ का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि कुछ निर्माणाधीन हैं।
मुआवजे से बनाया घर, अब टूटने का डर
प्रभावित परिवारों में अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं, जिनमें विधवा महिलाएं और दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं। कमला इवने ने बताया कि सड़क हादसे में पति और बेटे की मौत के बाद मिले मुआवजे और पीएम आवास योजना की मदद से उन्होंने घर बनाया था। अब मकान तोड़ने के नोटिस से उनका परिवार गहरे संकट में है।
नियमितीकरण के आदेश के बावजूद अधूरी प्रक्रिया
ग्रामीणों के अनुसार, जिस आबादी भूमि पर वे निवास कर रहे हैं, वहां कुल 72 परिवार रहते हैं, लेकिन कार्रवाई केवल 17 परिवारों के खिलाफ की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में अपर कलेक्टर द्वारा भूमि के नियमितीकरण के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन तहसील स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
ग्रामीणों ने कुछ प्रभावशाली लोगों पर झूठी शिकायत करने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर और आदिवासी विकास थाने में ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामले ने स्थानीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है।
