Betul News : बैतूल। भारतीय मजदूर संघ से जुड़े विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने बुधवार को राष्ट्रव्यापी आंदोलन के आह्वान पर शहर में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया के नाम ज्ञापन सौंपा।
यह ज्ञापन भारतीय मजदूर संघ के पुरी में आयोजित 21वें अखिल भारतीय त्रिवार्षिक अधिवेशन में पारित प्रस्तावों के आधार पर तैयार किया गया है।
श्रम कानूनों के समान लागू करने की मांग
ज्ञापन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि सभी सेक्टरों और श्रमिक वर्गों पर श्रम कानूनों को बिना किसी छूट के समान रूप से लागू किया जाए। संघ ने विशेष रूप से Industrial Relations Code, 2020 और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 में श्रमिकों की आशंकाओं और चिंताओं को दूर करने का आग्रह किया।
संघ का कहना है कि इन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पहले मजदूर हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
त्रिपक्षीय तंत्र के पुनर्गठन की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने त्रिपक्षीय तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया। ज्ञापन में Indian Labour Conference को तत्काल बुलाने तथा त्रिपक्षीय समितियों का पुनर्गठन कर उन्हें नियमित रूप से सक्रिय रखने की मांग की गई।
ईपीएस-95 और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख मांगें
संघ ने ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये प्रतिमाह करने और उसमें महंगाई भत्ता जोड़ने की मांग रखी।
इसके साथ ही—
- ईपीएफ के तहत अनिवार्य अंशदान की वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह करने,
- ईएसआईसी कवरेज सीमा 21,000 रुपये से बढ़ाकर 42,000 रुपये करने,
- तथा Payment of Bonus Act, 1965 में पात्रता एवं गणना सीमा बढ़ाने की मांग की गई।
ठेका व स्कीम वर्करों को स्थायी करने की मांग
संघ ने ठेका और स्कीम वर्करों को नियमित करने की मांग करते हुए कहा कि उन्हें संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 की भावना के अनुरूप समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
इसके अलावा नई भर्तियों पर लगी रोक हटाने, युवाओं को सुरक्षित एवं गारंटीड रोजगार देने और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग भी की गई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार ने श्रमिकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।






