Betul ki Khabar : बैतूल। नगर पालिका परिषद बैतूल के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सतीश मटसेनिया और उपयंत्री जतिन पाल को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई किदवई वार्ड, गौठाना स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में संचालित लीगेसी वेस्ट डंप साइट की सफाई परियोजना में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद की गई है।
जांच में सामने आईं आर्थिक व पर्यावरणीय गड़बड़ियां
कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि ठेकेदार द्वारा कार्य निर्धारित शर्तों और तकनीकी मापदंडों के अनुरूप नहीं किया गया। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों के विपरीत भुगतान कर दिया गया।
रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि परियोजना के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और मापदंडों की अनदेखी की गई, जिससे न केवल शासकीय धन का दुरुपयोग हुआ बल्कि पर्यावरणीय मानकों का भी उल्लंघन हुआ। ट्रेचिंग ग्राउंड से उठ रही दुर्गंध से आसपास के रहवासी लंबे समय से परेशान थे। क्षेत्र में जल और वायु प्रदूषण की शिकायतें भी लगातार मिल रही थीं।
विभागीय आयुक्त ने जारी किए निलंबन आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया। निलंबन अवधि में दोनों अधिकारियों का मुख्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, संभाग नर्मदापुरम संभाग रहेगा।
निलंबन अवधि के दौरान दोनों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
तीन करोड़ की परियोजना पर सवाल
जानकारी के अनुसार, ट्रेचिंग ग्राउंड से लीगेसी वेस्ट हटाने के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था। बावजूद इसके, कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन नहीं हो रहा था। स्थानीय नागरिकों ने कई बार शिकायत की थी कि कचरे के ढेर से बदबू और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है।
विधायक की नाराजगी के बाद तेज हुई कार्रवाई
इस मामले को लेकर बैतूल विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने प्रारंभ में कलेक्टर से जांच कराने की बात कही थी, लेकिन मामला सार्वजनिक रूप से आगे नहीं बढ़ा।
बाद में उन्होंने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की। इसके बाद नगरीय प्रशासन आयुक्त को बैतूल भेजा गया। उनके दौरे और समीक्षा के तुरंत बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
आगे क्या?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले में ठेकेदार की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जा रही है। यदि वित्तीय अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो रिकवरी, एफआईआर और ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई भी संभव है।
शहर में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी होती तो पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को इतना नुकसान नहीं उठाना पड़ता।






