Multai News : बैतूल। नगर पालिका इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है। हालात यह हैं कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है और ठेकेदार भुगतान के लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं। नगर पालिका का मासिक खर्च करीब 1 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जबकि वास्तविक आय महज 40 से 50 लाख रुपए के बीच सिमट गई है। आय और व्यय के इस बड़े अंतर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में आयोजित नगर पालिका परिषद की बैठक में वित्तीय स्थिति को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में नगर पालिका के सीएमओ वीरेंद्र तिवारी ने स्वीकार किया कि वर्तमान में नगर पालिका “आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया” की तर्ज पर काम कर रही है। उनका कहना था कि खर्च आय से कहीं अधिक है और यदि जल्द ही नए आय स्रोत विकसित नहीं किए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

बैठक में पार्षद रितेश विश्वकर्मा ने भी आर्थिक हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल खर्चों में कटौती कर समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने कर वसूली में सख्ती, बकाया करों की वसूली और नई राजस्व योजनाओं पर गंभीरता से अमल करने की जरूरत बताई।
वित्तीय असंतुलन का असर विकास कार्यों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई योजनाएं धनाभाव के कारण धीमी पड़ गई हैं। यदि समय रहते ठोस रणनीति नहीं बनाई गई तो कर्मचारियों और ठेकेदारों की परेशानी और बढ़ सकती है। अब निगाहें नगर पालिका प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस आर्थिक संकट से उबरने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।






