Betul Samachar : बैतूल। जिले के प्रसिद्ध भोपाली मेले के संचालन को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत सीताकामत की सरपंच शम्मी मंतु सलाम ने सोमवार को प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मेला प्रबंधन का अधिकार ग्राम पंचायत को देने की मांग की है।
सरपंच शम्मी सलाम का कहना है कि भोपाली मेला क्षेत्र ग्राम पंचायत की सीमा में आता है, इसलिए कानूनन इसके संचालन और इससे होने वाली आय पर ग्राम सभा का पहला अधिकार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा पिछले कई वर्षों से इस संबंध में प्रस्ताव भेज रही है, लेकिन जनपद पंचायत स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सरपंच ने अपने ज्ञापन में मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 58 एवं 80 तथा पेसा नियम 2022 के अध्याय-10, नियम-28 का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में मेला और बाजार संचालन पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी पंचायत के अधिकारों की अनदेखी की गई तो ग्राम सभा आंदोलन करेगी।
क्या कहता है पेसा एक्ट
पेसा एक्ट (PESA – पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरियाज) 1996 का कानून है, जो अनुसूचित यानी आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को विशेष अधिकार प्रदान करता है। इसके तहत जमीन, जल, जंगल, खनिज, मेला-बाजार और स्थानीय संसाधनों से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार ग्राम सभा को दिया गया है, ताकि स्थानीय लोग अपने विकास से जुड़े फैसले स्वयं ले सकें।
भाजपा नेता ने किया समर्थन
भाजपा जनजाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री दीपक उइके भी ग्राम पंचायत के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद पंचायत अधिसूचित क्षेत्र में ग्राम पंचायत की शक्तियों का हनन कर रही है और पेसा एक्ट की मंशा को नजरअंदाज किया जा रहा है। उइके ने कहा कि मेला और पार्किंग ठेकों से लाखों रुपये की आमदनी होती है, लेकिन उसका लेखा-जोखा पारदर्शी नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

जनपद अध्यक्ष ने मांग को बताया अनुचित
वहीं जनपद पंचायत अध्यक्ष राहुल उइके ने सरपंच और भाजपा नेता की मांग को अनुचित बताया है। उनका कहना है कि भोपाली मेले में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूर्व में ग्राम पंचायत को मेला व्यवस्था सौंपी गई थी, लेकिन वह इसे सुचारु रूप से संभाल नहीं पाई थी।

राहुल उइके ने कहा कि इस बार भी यह मांग अंतिम समय में रखी गई है, जबकि ऐसे विषयों पर पहले से चर्चा आवश्यक होती है। समय रहते प्रस्ताव आता तो उस पर विचार किया जा सकता था। फिलहाल मेले के प्रबंधन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।






